मुस्तादि गण : स्त्री विशिष्ट विकारों में उपयोगी अत्यंत वीर्यवान कल्प

मुस्तावचाग्निद्विनिशाद्वितिक्ता भल्लातपाठात्रिफलाविषाख्याः।  कुष्ठं त्रुटिं हैमवती च योनि … स्तन्यामयघ्ना मलपाचनाश्च॥ विशेष रूप से कफ प्रधान या शीतगुणजन्य स्निग्ध गुरु गुणजन्य क्लेद प्रधान पृथ्वी जल प्रधान स्त्री विशिष्ट विकारोमे उपयोगी अत्यंत वीर्यवान कल्प!  इस कल्प मे भी वचाहरिद्रादि गण के तीन मुख्य कंद द्रव्यों का समावेश है, वचा हरिद्रा व मुस्ता. तथापि यह कल्प/गण संतुलित नहीं है,

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शास्त्र पढना & तीर्थात्तशास्त्रार्थ & दृष्टकर्मा

आयुर्वेद के क्षेत्र में प्रायः “पढना लिखना न करते ही” कई लोग आयुर्वेद की प्रॅक्टिस करते है!?🤔⁉️😇 ऐसे कैसे? बीएमएस डिग्री लेते है ? वर्ष भर पढते है!! अंत मे परीक्षा लिखते है !! नहीं, वह “पढना लिखना” नही … “शास्त्र बिना पढे, शास्त्र बिना लिखे” ही, आयुर्वेद क्षेत्र में प्रायः प्रॅक्टिस करते है. बहुतांश प्रॅक्टिशनर

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