मुस्तादि गण : स्त्री विशिष्ट विकारों में उपयोगी अत्यंत वीर्यवान कल्प

मुस्तावचाग्निद्विनिशाद्वितिक्ता भल्लातपाठात्रिफलाविषाख्याः।  कुष्ठं त्रुटिं हैमवती च योनि … स्तन्यामयघ्ना मलपाचनाश्च॥ विशेष रूप से कफ प्रधान या शीतगुणजन्य स्निग्ध गुरु गुणजन्य क्लेद प्रधान पृथ्वी जल प्रधान स्त्री विशिष्ट विकारोमे उपयोगी अत्यंत वीर्यवान कल्प!  इस कल्प मे भी वचाहरिद्रादि गण के तीन मुख्य कंद द्रव्यों का समावेश है, वचा हरिद्रा व मुस्ता. तथापि यह कल्प/गण संतुलित नहीं है,

मुस्तादि गण : स्त्री विशिष्ट विकारों में उपयोगी अत्यंत वीर्यवान कल्प Read More »